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ⓘ दर्शन - अंतोनियो ग्राम्शी, अक्रियावाद, अक्षि उपनिषद, अजातिवाद, अज्ञेयवाद, अणुवाद ..



                                               

अंतोनियो ग्राम्शी

अंतोनियो ग्राम्शी इटली की कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक, मार्क्सवाद के सिद्धांतकार तथा प्रचारक थे। बीसवीं सदी के आरंभिक चार दशकों के दौरान दक्षिणपंथी फ़ासीवादी विचारधारा से जूझने और साम्यवाद की पक्...

                                               

अक्रियावाद

अक्रियावाद बुद्ध के समय का एक प्रख्यात दार्शनिक मतवाद। महावीर तथा बुद्ध से पूर्व के युग में भी इस मत का बड़ा बोलबाला था। इसके अनुसार न तो कोई कर्म है, न कोई क्रिया और न कोई प्रयत्न। इसका खंडन जैन त...

                                               

अक्षि उपनिषद

अक्षि उपनिषद कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत एक उपनिषद है। यह उपनिषद संस्कृत भाषा में लिखित है। इसके रचियता वैदिक काल के ऋषियों को माना जाता है परन्तु मुख्यत वेदव्यास जी को कई उपनिषदों का लेखक मा...

                                               

अजातिवाद

गौडपादाचार्य ने मांडूक्यकारिका में सिद्ध किया है कि कोई भी वस्तु कथमपि उत्पन्न नहीं हो सकती। अनुत्पत्ति के इसी सिद्धांत को अजातिवाद कहते हैं। गौडपादाचार्य के पहले उपनिषदों में भी इस सिद्धांत की ध्व...

                                               

अज्ञेयवाद

अज्ञेयवाद ज्ञान मीमांसा का विषय है, यद्यपि उसका कई पद्धतियों में तत्व दर्शन से भी संबंध जोड़ दिया गया है। इस सिद्धांत की मान्यता है कि जहाँ विश्व की कुछ वस्तुओं का निश्चयात्मक ज्ञान संभव है, वहाँ क...

                                               

अणुवाद

अणुवाद दर्शन में प्रकृति के अल्पतम अंश को अणु या परमाणु कहते हैं। अणुवाद का दावा है कि प्रत्येक प्राकृत पदार्थ अणुओं से बना है और पदार्थों का बनना तथा टूटना अणुओं के संयोग वियोग का ही दूसरा नाम है।...

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शब्दकोश

अनुवाद

अंतोनियो ग्राम्शी पुस्तकें.

Arunachal University of Studies. तुलसीराम: फुले और ग्राम्शी की परंपरा का बुद्धिजीवी इस मायने में वे भारत के जड़बुद्धि वामपंथियों से अलग लकीर खींचते हैं और इटली के वामपंथी कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी अंतोनियो ग्राम्शी से खुद को ज़्यादा क़रीब पाते हैं. Hegemony पर ग्राम्शी के विचार. सांस्कृतिक और राजनीतिक चिंतन के बुनियादी. भूमंडलीकरण. ऊपर से थोपी जाने वाली सत्ता का एकालाप है। यह आदेशों और धमकियों के रूप में सामने. आता है। इनका प्रयोग शासित राष्ट्रों के मध्य बनायी जाने वाली कृत्रिम सहमति ​अंतोनियो. ग्राम्शी द्वारा प्रयुक्त किगए भाव के संदर्भ में को. अंतोनियो ग्राम्शी Owl. इटली के माक्र्सवादी विचारक अंतोनियो ग्राम्शी 1891 1937 की जेल डायरी को आज श्रेष्ठ वैचारिक लेखन का उदाहरण माना जाता है। फासिस्टों के कारागार में रहते हुए उन्होंने अपने देश के इतिहास, संस्कृति, मॉर्क्सवाद, कम्युनिस्ट.





अल्फावेट अ ब्लॉगसेतु.

अक्रियावाद. ENCYCLOPEDIA से. यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज. अक्रियावाद. Non activism. एक मत,जो जीवादि पदार्थों में क्रिया का एकान्तरूप से आभार मानता है । ​?title अक्रियावाद&oldid 106420 से लिया गया. कहानी पढ़ें हिंदी कहानियाँ, कवितायें और. पूरण कश्यप के सिद्धांत को अक्रियावाद कहा जाता है। इसके मत के अनुसार मनुष्य जो कुछ अच्छा बुरा करता है वह उसके द्वारा किया हुआ नहीं होता, इसीलिए उसे पुण्य एवं पाप की प्राप्ति नहीं होती। प्रकुध कात्यायन के अनुसार पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु,. Page 1 भवतु सब्ब मंगलं राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली. दूसरा दृष्टिकोण अक्रियावाद का था। अक्रियावाद. के तात्त्विक आधार या तो विभिन्न नियतिवादी दृष्टिकोण के थे या आत्मा को कूटस्थ एवं. अकर्ता मानने की तात्त्विक धारणा थी। नैतिक दर्शन की दृष्टि से ये परंपराएँ ज्ञानमार्ग की. प्रतिपादक थी. अक्रियावाद बुद्ध के समय का एक प्रख्यात दार्शनिक. उसे अक्रियावादी कहा जाता है। संभवत: पुरण कश्यप ने ही सांख्य दर्शन की नींव डाली। इसके अनुसार आत्मा शरीर से पृथक है। आगे चलकर पुरण कश्यप के संप्रदाय का मक्खलि गोशाल के संप्रदाय में विलय हो गया। मक्खलि गोशाल वह छः वर्षों तक महावीर के साथ.


पाखण्ड खंडिनी Archives Aryamantavya.

किसी किसी का विचार है कि कबीर साहब अपठित थे, उन्होंने वेद शास्त्रा उपनिषदों को पढ़ा नहीं, कुरान के विषय में भी वे ऐसे हाथ पाँव, इत्यादि घिसे हुए शब्द ही हैं,जो काल प्रवाह में पड़कर इस दशा को प्राप्त हुए हैं, उनके स्थान पर मुख, अक्षि, कर्ण​,. सिलेबस RCCM Indore. कृष्ण यजुर्वेदीय. अक्षि उपनिषद अमृतबिन्दु उपनिषद अमृतनादोपनिषद अवधूत उपनिषद ब्रह्म उपनिषद ब्रह्मविद्या उपनिषद दक्षिणामूर्ति उपनिषद ध्यानबिन्दु उपनिषद एकाक्षर उपनिषद गर्भ उपनिषद कैवल्योपनिषद कालाग्निरुद्रोपनिषद कर उपनिषद. पुरातन भारतीय साहित्य में नाग अर्थात सर्प Ugta. मनमाफिक लगे, तो अपने कमेंट्स अवश्य लिखे। शेयर लाइक करेशांडिल्य उपनिषद में शरीर के 18 मर्मस्थान बताये गये हैं ​तन में इन 18 जगह प्राण वि. 14अक्षि यानि दो की संख्या या दोनो आंखों को कहते हैं। सम्मोहन सिद्धि में अक्षि का बहुत महत्व है. SSC ONLINE TEST: SSC CGL GK TEST 6 – GOVT JOBS TAIYARI. अक्षि उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद् ७३.​अध्यात्मा उपनिषद् शुक्ल यजुर्वेद, सामान्य उपनिषद् ७४.​कुण्डिक उपनिषद् साम वेद, संन्यास उपनिषद् ७५.सावित्रि उपनिषद् साम वेद, सामान्य उपनिषद् ७६.आत्मा उपनिषद् अथर्व वेद,.





अनटाइटल्ड.

5 अजातवाद, अजातिवाद अथवा जगद्रहित शुद्ध ब्रह्मवाद ​अकास्मिज्म इस मत के अनुसर ईश्वर के अतिरिक्त और कोई सत्ता ही नहीं है। सर्वत्र ब्रहा ही ब्रह्म है। जगत् नाम की वस्तु न कभी उत्पन्न हुई, न है और न होगी। जिसको हम जगत् के रूप में देखते हैं वह. Blogs 491186 Lookchup. गौडपाद के अजातिवाद का विवेचन कीजिए। Discuss Ajativada according to Gaudapada. 5. अथातोब्रह्म जिज्ञासा सूत्र में अथ शब्द की व्याख्या कीजिए। Explain the word Atha in Athatobrahmajigyaysa Sutra. 6. जगत् मिथ्या है। विवेचन कीजिए। The World is Mithya. Discuss. 7.


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