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ⓘ धनु वैदिक काल की हिन्दू लम्बाई मापन की इकाई है। एक धनु बराबर होता है दो दण्ड के। पांच धनु से एक रज्जु बनता है। विष्णु पुराण अनुसार 2 धनुषदण्ड= एक नाड़िका 4 हस्त ..



                                               

धन विधेयक

अनुच्छेद 110 के अंतर्गत धन विधेयक की परिभाषा दी गई है |इसके तहत कोई विधेयक धन विधेयक तक समझा जाएगा यदि उसमें केवल निम्नलिखित सभी के लिए विषयों से संबंधित प्रावधान है भारत की संचित निधि में से किसी ...

                                               

सुबा देवहंस कषाणा

                                               

जीविकोपार्जन

जीविकोपार्जन वह कार्य या व्यवसाय है, जो जीवन निर्वाह के उद्देश्य से किया जाता है। ऐसे आर्थिक लाभ या धन अर्जन का मुख्य उद्देश्य जीवन निर्वाह होता है, धन संचय नहीं।

                                               

चालू खाता

चालू खाता:- चालू खाता उद्योगपतियों, फर्म, कंपनी आदि के लिए होता है| चालू खातों से बड़ी मात्रा में धन निकाला व जमा किया जाता है| चालू खातों में जमा करने तथा निकासी की कोई सीमा नहीं होती है, धन को दे...

                                               

खाता

खाता शब्द के निम्नलिखित अर्थ हो सकते हैं: अभौतिक खाता - डीमैट खाता, जिसमें शेयर एवं प्रतिभूतियाँ इलेक्ट्रानिक रूप में रखी जातीं है। बही-खाता - दो प्रविष्टियों वाली डबल इंट्री बुककीपिंग की भारतीय पद...

धनु
                                     

ⓘ धनु

धनु वैदिक काल की हिन्दू लम्बाई मापन की इकाई है। एक धनु बराबर होता है दो दण्ड के। पांच धनु से एक रज्जु बनता है।

विष्णु पुराण अनुसार
  • 2 धनुष/दण्ड= एक नाड़िका
  • 4 हस्त= एक धनुष या दण्ड
                                     

1. परिमाण

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:-

अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें
  • तर्जनी तक=प्रदेश
  • कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल
  • मध्यमा तक=नाल
  • अनामिका तक=गोकर्ण

वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु संहिता में नहीं उल्लेखित है:-

  • 4 हस्त= 1 धनु
  • 2000 धनु= l गाव्यूति
  • 24 अंगुल= 1 हस्त
  • 21 अंगुल= 1 रत्नि
  • 2 रत्नि= 1 किश्कु
  • 8000 धनुष= 1 योजन
  • 4 अरत्नि = 1 दण्ड = 1.5 से 2.0 m
  • 5 धनु = 1 रज्जु = 15 m से 20 m
  • 2 वितस्ति = 1 अरत्नि हस्त = 375 mm से 500 mm
  • 100 परिदेश = 1 कोस या गोरत = 3 km से 4 km
  • 2 रज्जु = 1 परिदेश = 30 m से 40 m
  • 8 अंगुल = एक धनु मुष्टि अंगुष्ठ उठा के = 125 mm से 167 mm ;
  • 4 अंगुल = एकधनु ग्रह = 62 mm से 83 mm;
  • 1 अंगुल = 16 mm से 21 mm
  • 1.000 योजन = 1 महायोजन = 13.000 Km से 16.000 Km
  • 4 कोस या कोश = 1 योजन = 13 km से 16 km
  • 2 दण्ड = 1 धनु = 3 से 4 m
  • 12 अंगुल = 1 वितस्ति अंगुषठ के सिरे से पूरे हाथ को खोल कर कनिष्ठिका अंगुली के सिरे तक की दूरी = 188 mm से 250 mm

=== विष्णु पुराण:भाग १, अध्याय षष्ठम के अनुसार ===

  • 10 तृसरेणु= 1 धूलि कण या महिरजस
  • 10 परमाणु= 1 परसूक्षम
  • 10 यूक= 1 यवोदर जौ का बीज
  • 10 लिख्या= 1 यूक
  • 10 महिरजस= 1 बाल अग्र बालाग्र
  • 10 जौ के दाने= 1 अंगुल या इंच
  • 10 बालाग्र= 1 लिख्या
  • 10 परसूक्षम= 1 तृसरेणु
  • 10 यवोदर= 1 जौ का दाना औसत आकार
  • 6 अंगुल= एक पद
  • 2 धनुष/दण्ड= एक नाड़िका
  • 2 वितस्ति= 1 हस्त
  • 2000 धनुष= एक गाव्यूति
  • 4 हस्त= एक धनुष या दण्ड
  • 4 गाव्यूति= एक योजन
  • 2 पद= 1 वितस्ति
ब्रह्माण्ड का परिमाण

यह अधिक वर्णित नहीं है.

शब्दकोश

अनुवाद
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