ⓘ मुक्त ज्ञानकोश. क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 51



                                               

मनुस्मृति

मनुस्मृति हिन्दू धर्म का एक प्राचीन धर्मशास्त्र है। इसे मानव-धर्म-शास्त्र, मनुसंहिता आदि नामों से भी जाना जाता है। यह उपदेश के रूप में है जो मनु द्वारा ऋषियों को दिया गया। इसके बाद केk धर्मग्रन्थकारों ने मनुस्मृति को एक सन्दर्भ के रूप में स्वीकार ...

                                               

मन्त्र

सत्संग लिए सत्संग देखें । गुप्तमन्त्र लिए तंत्र देखें हिन्दू श्रुति ग्रंथों की पारंपरिक रूप मंत्र कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ विचार या चिन्तन होता है । मंत्रणा, और मंत्री इसी मूल से बने शब्द हैं। मन्त्र भी एक प्रकार की वाणी है, परन्तु साधारण व ...

                                               

मन्दिर

भारतीय धर्मों हिन्दुओं के उपासनास्थल को मन्दिर कहते हैं। यह अराधना और पूजा-अर्चना के लिए निश्चित की हुई जगह या देवस्थान है। यानी जिस जगह किसी आराध्य देव के प्रति ध्यान या चिंतन किया जाए या वहां मूर्ति इत्यादि रखकर पूजा-अर्चना की जाए उसे मन्दिर कह ...

                                               

मन्दोदरी

मंदोदरी रामायण के पात्र, पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा गया है। मंदोदरी मयदानव की पुत्री थी। उसका विवाह लंकापति रावण के साथ हुआ था। हेमा नामक अप्सरा से उत्पन्न रावण की पटरानी जो मेघनाथ की माता तथा मयासुर की कन्या थी। अतिकाय व अक ...

                                               

मरुद्गण

मरुद्गण एक देवगण का नाम। वेदों में इन्हें रुद्और वृश्नि का पुत्र लिखा है और इनकी संख्या ६० की तिगुनी मानी गई है; पर पुराणों में इन्हें कश्यप और दिति का पुत्र लिखा गया है जिसे उसके वैमात्रिक भाई इंद्र ने गर्भ काटकर एक से उनचास टुकड़े कर डाले थे, ज ...

                                               

महाबलि

बाली, एक असुर, था के बेटे देवाम्बा और विरोचना. वह बड़ा हुआ के संरक्षण के अंतर्गत अपने दादा, प्रहलाद, जो में डाले उसे एक मजबूत भावना के धार्मिकता और भक्ति. बाली होगा अंततः अपनी सफल राजा के रूप में दादा असुरा और अपने दायरे से अधिक शासनकाल था द्वारा ...

                                               

महावाक्य

महावाक्य से उन उपनिषद वाक्यो का निर्देश है जो स्वरूप में लघु है, परन्तु बहुत गहन विचार समाये हुए है। प्रमुख उपनिषदों में से इन वाक्यो को महावाक्य माना जाता है - अहं ब्रह्मास्मि - "मैं ब्रह्म हुँ" बृहदारण्यक उपनिषद १/४/१० - यजुर्वेद तत्त्वमसि - "व ...

                                               

महिरजस

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें तर्जनी तक=प्रदेश अनामिका तक=गोकर्ण कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल मध्यमा तक=नाल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

माधवदेव

माधवदेव का जन्म असम के उत्तर लखीमपुर जनपद के अंतर्गत नारायणपुर के समीप हरिसिंगबरा के घर संवत् 1489 में हुआ। इनके पिता गोविंदागिरि रंगपुर जिले के वांडुका नामक स्थान में रहकर राजा का कार्य करते थे। यहीं से व्यापार के लिये वे पूर्व असम की ओर गए। देश ...

                                               

मान्धातृ

मान्धातृ मान्धाता अयोध्या के राजा, वैदिक काल के सम्राट थे। मान्धातृ अथवा मांधाता, इक्ष्वाकुवंशीय नरेश युवनाश्व और गौरी के पुत्र। उन्हे सौ राजसूय तथा अश्वमेध यज्ञों का कर्ता और दानवीर, धर्मात्मा चक्रवर्ती सम्राट् जो वैदिक अयोध्या नरेश मंधातृ से अभ ...

                                               

मीठे जल का सागर

विष्णु पुराण के अनुसार यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुई है। ये सातों द्वीप चारों ओर से सात समुद्रों से घिरे हैं। ये सभी द्वीप एक के बाद एक दूसरे को घेरे हुए बने हैं और इन्हें घेरे हुए सातों समुद्र हैं। मीठे जल का सागर पुष्करद्वीप को घेरे हुए है ...

                                               

मेघवाल

मेघ, मेघवाल, या मेघवार, लोग मुख्य रूप से उत्तर पश्चिम भारत में रहते हैं और कुछ आबादी पाकिस्तान में है। सन् 2008 में, उनकी कुल जनसंख्या अनुमानतः 2.807.000 थी, जिनमें से 2760000 भारत में रहते थे। इनमें से वे 659000 मारवाड़ी, 663000 हिंदी, 230000 डो ...

                                               

मैत्रायणी उपनिषद्

मैत्रायणी उपनिषद् सामवेदीय शाखा की एक संन्यासमार्गी उपनिषद् है। ऐक्ष्वाकु बृहद्रथ ने विरक्त हो अपने ज्येष्ठ पुत्र को राज्य देकर वन में घोर तपस्या करने के पश्चात् परम तेजस्वी शाकायन्य से आत्मान की जिज्ञासा की, जिसपर उन्होंने बतलाया कि ब्रह्मविद्या ...

                                               

मोक्ष

पुरुषार्थ के लिए पुरुषार्थ देखें। आश्रम के लिए आश्रम देखें। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार जीव का जन्म और मरण के बंधन से छूट जाना ही मोक्ष है। भारतीय दर्शनों में कहा गया है कि जीव अज्ञान के कारण ही बार बार जन्म लेता और मरता है । इस जन्ममरण के बंध ...

                                               

यज्ञ

कर्मकांड लिए श्रौतसूत्र देखें। गृहस्थ लिए हवन देखें। यज्ञ, कर्मकांड की विधि है जो परमात्मा द्वारा ही हृदय में सम्पन्न होती है। जीव के अपने सत्य परिचय जो परमात्मा का अभिन्न ज्ञान और अनुभव है, यज्ञ की पूर्णता है। यह शुद्ध होने की क्रिया है। इसका सं ...

                                               

यमराज

यमराज हिन्दू धर्म के अनुसार मृत्यु के देवता हैं। इनका उल्लेख वेद में भी आता है। इनकी जुड़वां बहन यमुना है। यमराज, महिषवाहन दण्डधर हैं। वे जीवों के शुभाशुभ कर्मों के निर्णायक हैं। वे परम भागवत, बारह भागवताचार्यों में हैं। यमराज दक्षिण दिशा के दिक् ...

                                               

यवोदर

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें तर्जनी तक=प्रदेश अनामिका तक=गोकर्ण मध्यमा तक=नाल कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

युग वर्णन

युग का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। उदाहरणः कलियुग, द्वापर, सत्ययुग, त्रेतायुग आदि। युग वर्णन का अर्थ होता है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई होती है एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे में विस्त ...

                                               

युगधर्म

इतिहास-पुराणों में युगधर्म का विस्तार के साथ प्रतिपादन मिलता है । किस काल में युग संबंधी पूर्वोक्त धारणा प्रवृत्त हुई थी, इस संबंध में गवेषकों का अनुमान है कि ख्रिष्टीय चौथी शती में यह विवरण अपने पूर्ण रूप में प्रसिद्ध हो गया था। वस्तुत: ईसा पूर् ...

                                               

यूक

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें अनामिका तक=गोकर्ण तर्जनी तक=प्रदेश मध्यमा तक=नाल कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

योजन

योजन वैदिक काल की हिन्दू लम्बाई मापन की इकाई है। 100 योजन से एक महायोजन बनता है। चार गाव्यूति = एक योजन १ योजन कितनी दूरी होती है, यह अलग-अलग भारतीय खगोलविदों ने अलग-अलग दिया है। सूर्य सिद्धान्त में १ योजन को ८ किमी के बराबर लिया गया है। इसी तरह ...

                                               

रंगोली

अधिक विकल्पों के लिए यहाँ जाएँ - रंगोली रंगोली भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा और लोक-कला है। अलग प्रदेशों में रंगोली के नाम और उसकी शैली में भिन्नता हो सकती है लेकिन इसके पीछे निहित भावना और संस्कृति में पर्याप्त समानता है। इसकी यही विशेषता इस ...

                                               

रघुनन्दन भट्टाचार्य

रघुनन्दन भट्टाचार्य बंगाल के विधि-ग्रन्थों के रचनाकारों में प्रमुख थे। इनका जन्म नवद्बीप में हुआ था। पिता का नाम था हरिहर। बंगाल के प्रख्यात निबन्धकार। इन्होने स्मृतितत्व नाम से २८ निबन्ध, तीर्थयात्राविधि आदि प्रयोगग्रन्थ आदि लिखे। बंगीय़ निबन्धा ...

                                               

रघुपति राघव राजाराम

रघुपति राघव राजा राम के नाम से भी जाना जाता था। यह एक भारतीय प्रसिद्ध भजन है,तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सबसे पसंदिता भजन था। इसके गीत के शब्द श्री नम: रामायणम् से लिगए हैं जो लक्ष्मणाचार्य ने लिखी थी। मूल भजन-पद: रघुपति राघव राजाराम पतित पा ...

                                               

रत्नि

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल अनामिका तक=गोकर्ण तर्जनी तक=प्रदेश मध्यमा तक=नाल वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

राजदेवी मन्दिर

राजदेवी मन्दिर सप्तरी जिला के मुख्यालय राजविराज के राजदेवी टोल में अवस्थित हैं। प्राचीन इतिहास से सुसंपन्न इस मन्दिर के नाम से ही राजविराज नगर का नाम रखा गया हैं। राजदेवी मन्दिर के भीतर मौजूद भगवती प्रतिमा सेन वंश की इष्टदेवी मानी जाती हैं। राजदे ...

                                               

राधा

अधिक तर लोग जो कृष्ण की राधा के बारे मे बाते करते है,राधा कृष्ण के प्रेम की चर्चा किया करते है राधा कृष्ण को मन धन से प्रेमी रूप मे पूजन करती थी और श्री कृष्ण भी अपनी बासुरी को और राधा को अधिकाधिक प्रेम करते थे जिनके प्रेम जोडी आज के नवयुगलों को ...

                                               

राम

भगवान श्रीरामचन्द्र हिंदू धर्म के सबसे पूज्यनीय सबसे महानतम देव माने जाते हैं । रामायण में वर्णन अनुसार राजा दशरथ की पत्नी को पुत्र उत्पन्न नही हो रहा था तो सृंगी ऋषि द्वारा प्रसाद स्वरूप खीर को खाने सेपुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। जिसे राम के न ...

                                               

राम जन्मभूमि

हिन्दुओं के प्रामाणिक धर्मग्रंथ रामचरितमानस के अनुसार श्री भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। उनके जन्मस्थान पर एक भव्य मन्दिर विराजमान था जिसे मुगल आक्रमणकारी बाबर ने तोड़कर वहाँ एक मस्जिद बना दी थी जिससे बाबरी मस्जिद कहा जाता था। राष्ट् ...

                                               

राम नवमी

रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी मनाया जाता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ । उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ् ...

                                               

रामकृष्ण मिशन

साँचा:Religious text primary रामकृष्ण मिशन की स्थापना १ मई सन् १८९७ को रामकृष्ण परमहंस के परम् शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने की। इसका मुख्यालय कोलकाता के निकट बेलुड़ में है। इस मिशन की स्थापना के केंद्र में वेदान्त दर्शन का प्रचार-प्रसार है। रामकृष् ...

                                               

रामद्वारा

                                               

रामनाम

रामनाम का शाब्दिक अर्थ है - राम का नाम। रामनाम से आशय विष्णु के अवतार राम की भक्ति से है या फिर निर्गुण निरंकार परम ब्रह्म से। हिन्दू धर्म के विभिन्न सम्रदायों में राम के नाम का कीर्तन या जप किया जाता है। "श्रीराम जय राम जय राम" एक प्रसिद्ध मंत्र ...

                                               

रामप्पा मंदिर

इस्वी सन १२१३ में वारंगल, आंध्र प्रदेश के काकतिया वंश के महाराजा गणपति देव को एक शिव मंदिर बनाने का विचार आया। उन्होनें अपने शिल्पकार रामप्पा को ऐसा मंदिर बनाने को कहा जो वर्षों तक टिका रहे. रामप्पा ने की अथक मेहनत और शिल्प कौशल ने आखिरकार मंदिर ...

                                               

रामभद्राचार्य

जगद्गुरु रामभद्राचार्य, पूर्वाश्रम नाम गिरिधर मिश्र चित्रकूट में रहने वाले एक प्रख्यात विद्वान्, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और हिन्दू धर्मगुरु हैं। वे रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानन्दाचार्यों में से ए ...

                                               

रामसनेही सम्प्रदाय

रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्त्तक स्वामी रामानन्द जी महाराज थे। जन को लोकभाषा में धर्म के मर्म की बात समझाकर, एक सूत्र में पिरोने में इस संप्रदाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन संतों ने हिंदू-मुसलमान, जैन- वैष्णव, द्विज- शूद्र, सगु ...

                                               

रामायण आरती

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामायण आरती वह संगीतमय प्रार्थना है जो रामचरितमानस के किसी अंश या संपूर्ण पाठ के पूरे होने पर की जाती है। इसमें रामचरितमानस की महिमा का गुणगान किया गया है। आरती श्री रामायण जी की । कीरति कलित ललित सिय पी की ॥ गावत ब् ...

                                               

रास पंचाध्यायी

रास पंचाध्यायी मूलत: भागवत पुराण के दशम स्कंध के उनतीसवें अध्याय से तैंतीसवें अध्याय तक के पाँच अध्यायों का नाम है। यह संस्कृत का कोई स्वतंत्र ग्रंथ नहीं है। किंतु हिंदी में रास पंचाध्यायी नाम से स्वतंत्र ग्रंथ लिखे गए और यह नाम अत्यंत प्रसिद्ध ह ...

                                               

राहु काल वेला

राहु नैसर्गिक पाप ग्रह है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु शुभ कार्यो में विघ्न और बाधा डालने वाला ग्रह है अत: राहु काल में किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करनी चाहिए। ग्रहों के गोचर के क्रम में सभी ग्रहों का अपना नियत समय होता है इसी प्रकार प्रत् ...

                                               

रूस में हिन्दू धर्म

वर्ष २०१० की जनगणना के अनुसार रूस में लगभग ०.१ प्रतिशत लोग हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं। रूस में हिन्दू धर्म के प्रसार का श्रेय मुख्यतः इस्कॉन को जाता है।

                                               

रोपनी

एक बीघा बराबर है: 1333.33 वर्ग मीटर बंगालमें 14.400 वर्ग फ़ीट 1337.8 m² या 5 कठ्ठा आसाम में, 2500 वर्ग मीटर राजस्थान में 2529.2 वर्ग मीटर 27.225 वर्ग फिट या २० कठ्ठा बिहार में, कठ्ठा कठ्ठा क मान भारत मे अलग स्थानो पर अलग है, जैसे एक कठ्ठा=1361.25 ...

                                               

लक्ष्मी

लक्ष्मी हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। वह भगवान विष्णु की पत्नी हैं। पार्वती और सरस्वती के साथ, वह त्रिदेवियाँ में से एक है। और धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दीपावली के त्योहार में उनकी गणेश सहित पूजा की जाती है। जिनका ...

                                               

लक्ष्मी पूजा

वैदिक काल में अनेक प्रकार के यज्ञ हुआ करते थे। यज्ञ उस युग का सबसे बड़ा सांस्कृतिक समारोह होता था। ये यज्ञ साधारण भी होते थे--और असाधारण भी। कुछ यज्ञों को तो राजा-महाराजा ही कर सकते थे, जैसे अश्वमेध, राजसूय, आदि। पर कुछ यज्ञ नियमित रूप से सब आर्य ...

                                               

लल्लेश्वरी

लल्लेश्वरी या लल्ल-दय्द के नाम से जाने जानेवाली चौदवहीं सदी की एक भक्त कवियित्री थी जो कश्मीर की शैव भक्ति परम्परा और कश्मीरी भाषा की एक अनमोल कड़ी थीं। लल्ला का जन्म श्रीनगर से दक्षिणपूर्व मे स्थित एक छोटे से गाँव में हुआ था। वैवाहिक जीवन सु:खमय ...

                                               

लालबाग का राजा

लालबाग का राजा मुंबई का सबसे अधिक लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडल है। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल मंडल की स्थापना वर्ष १९३४ में हुई थी। यह मुंबई के लालबाग, परेल इलाके में स्थित हैं। आज हालत यह है कि लालबाग के राजा के दर्शन करना ही अपने आप ...

                                               

लिंगोद्भव

लिंगोद्भव शिव का प्रतीकात्मक रूप में निरूपण है जो प्रायः दक्षिण भारत के मन्दिरों में देखने को मिलता है। लिंगोद्भव में लिंग के जन्म की कथा दर्शायी गयी होती है। लिङ्गोद्भव की कथा अनेक पुराणों में आती है।

                                               

लिख्या

विष्णु पुराण के अनुसार मानव हस्त परिमाण इस प्रकार हैं:- अंगुष्ठ से दूरी दांये चित्र में देखें कनिष्ठिका तक= वितस्ति = 12 अंगुल मध्यमा तक=नाल तर्जनी तक=प्रदेश अनामिका तक=गोकर्ण वायु ने मनु के अधिकार के अन्तर्गत उपरोक्त समान गणना दी है, जो कि मनु स ...

                                               

वरुण (देव)

वरुण हिन्दू धर्म के एक प्रमुख देवता हैं। प्राचीन वैदिक धर्म में उनका स्थान बहुत ही महत्त्वपूर्ण था पर वेदों में उसका रूप इतना अमूर्त हैं कि उसका प्राकृतिक चित्रण मुश्किल है। माना जाता है कि वरुण की स्थिति अन्य वैदिक देवताओं की अपेक्षा प्राचीन है, ...

                                               

वानप्रस्थ संस्कार

गृहस्थ की जिम्मेदारियाँ यथा शीघ्र करके, उत्तराधिकारियों को अपने कार्य सौंपकर अपने व्यक्तित्व को धीरे-धीरे सामाजिक, उत्तरदायित्व, पारमार्थिक कार्यों में पूरी तरह लगा देने के लिए वानप्रस्थ संस्कार कराया जाता है। इसी आधापर समाज को परिपक्व ज्ञान एवं ...

                                               

वामदेव

वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा "जन्मत्रयी" के तत्ववेत्ता हैं जिन्हें गर्भावस्था में ही अपने विगत दो जन्मों का ज्ञान हो गया था और उसी अवस्था में इंद्र के साथ तत्वज्ञान पर इसकी चर्चा हुई थी। वैदिक उल्लेखानुसार स ...

शब्दकोश

अनुवाद
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